नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको बताने वाले हैं, वाराणसी के बारे में, भगवान शिव की नगरी दीपों का शहर मोक्ष की नगरी बनारस और काशी इन सभी नामों से जाने जाने वाले शहर वाराणसी के बारे में जानेंगे।

बनारस इस नाम को सुनते ही हमारे ख्याल में गंगा नदी के घाट किस का पुराना इतिहास और शहर की तंग गलियां तुरंत हमारे सामने आने लगती हैं। बनारस केवल भारतीयों के लिए ही नहीं बल्कि विदेशी टूरिस्ट द्वारा भी काफी पसंद किया जाता है।

वाराणसी अपनी कई मंदिरों के अलावा घाटों और खाने-पीने के कारण काफी फेमस है। पर कुछ सालों से तो यहां की देव दीपावली भी वर्ल्ड फेमस हो रही है। जिसकी चर्चा हम आगे लेख में भी करेंगे।

वाराणसी आप कैसे पहुंच सकते हैं? वहां पहुंचने के लिए कौन कौन से माध्यम हैं? वहां रुकने की क्या-क्या व्यवस्थाएं हैं और वहां खाने-पीने की क्या-क्या व्यवस्थाएं हैं? वहां जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा होता है? और वह जाने में कितना खर्चा आएगा।

इसके अलावा बनारस के प्रसिद्ध मंदिर, बनारस के प्रमुख दर्शनीय स्थल, और बनारस में घूमने की जगह तो अगर आप यह सभी सवालों के जवाब इस लेख के माध्यम से जाना चाहते हैं तो इसलिए को पूरा जरूर पढ़ें तो चलिए शुरू करते हैं।

वाराणसी कैसे जाएं? | बेस्ट समय | होटल | भोजन | पर्यटक स्थल
वाराणसी कैसे जाएं? | बेस्ट समय | होटल | भोजन | पर्यटक स्थल

वाराणसी से जुड़ी कुछ जानकारी?

वाराणसी को हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा पवित्र शहरों में से एक माना जाता है। वाराणसी हिंदू धर्म में एक बहुत ही प्रसिद्ध स्थान होने के साथ-साथ एक स्थानीय यात्रियों के साथ-साथ एक पर्यटन स्थल भी है जो तीर्थ यात्रियों के साथ साथ पर्यटकों के लिए भी बेहद खास स्थान हैं। वाराणसी शहर पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंगा हुआ है।

इस शहर का सबसे दिलचस्प पहलू, यहां पर स्थित कई घाटों का होना है। यहां कुल 84 घाट हैं। इन घाटों से गंगाजी तक जाने के लिए कई सीढ़ियों से उतरना पड़ता है। यहां हर सुबह और शाम को भव्य आरती का आयोजन किया जाता है। मंदिरों और घाटों के अलावा बनारस खाने-पीने के शौकीन लोगों के लिए काफी पसंदीदा शहर भी है।

यहां के बनारसी साड़ी और बनारसी पान तो पूरे देश में प्रसिद्ध है। वाराणसी को हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा पवित्र शहरों में से एक माना जाता है।

वाराणसी जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? | बनारस कब जाना चाहिए?

वाराणसी जाने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है। इन महीनों में वहां का मौसम यात्रा के लिए अनुकूल होता है। नवंबर में हर साल वाराणसी में एक पंच दिवसीय उत्सव गंगा महोत्सव मनाया जाता है।

वाराणसी कैसे पहुंचे?

सबसे पहले बनारस पहुंचने के माध्यमों के बारे में बात करते हैं

ट्रेन से वाराणसी कैसे जाएं

वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन भारत के कई प्रमुख शहरों से रेल के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। देश की अधिकांश मुख्य ट्रेनिंग यहां से गुजरती हैं। इसके अलावा वाराणसी से 18 किलोमीटर दूर मुगलसराय जिसको अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नाम से जाना जाता है। वह स्टेशन मौजूद है।

आप भारत के किसी भी बड़े शहरों से वाराणसी या पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं। रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद आप इस शहर को घूमने के लिए टैक्सी या केब किराए पर ले सकते हैं।

सड़क मार्ग से वाराणसी कैसे जाएं

दोस्तों वाराणसी पहुंचने के लिए आप सड़क मार्ग से कहीं भी हो बनारस हर जगह से जुड़ा हुआ है। वाराणसी के लिए बहुत से प्राइवेट और पब्लिक बसें देश के विभिन्न शहरों से चलती हैं। इस शहर के लिए आपको दिल्ली और आसपास के शहरों से बस आसानी से भी मिल जाएगी।

हवाई जहाज से वाराणसी कैसे जाएं

दोस्तों अगर आप फ्लाइट से बनारस आना चाहते हैं। तो यहां स्थित लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा है। जहां पर आप फ्लाइट के माध्यम से वाराणसी पहुंच सकते हैं।

वाराणसी में स्थित प्रसिद्ध पर्यटक स्थल?

सबसे पहले जानते हैं। वाराणसी में सबसे ज्यादा फेमस यहां के घाटों के बारे। वाराणसी में छोटे बड़े सभी घाट मिलाकर लगभग 84 घाट हैं। इनमें से अधिकांश घाट नहाने और पूजा समारोह के लिए उपयोग किए जाते हैं। जबकि 2 घाटों का विशेष रूप से दास संस्कार के रूप में प्रयोग किया जाता है।

वैसे घाट कोई भी हो वाराणसी में सुबह और शाम के समय नाव की सवारी कराना एक अद्भुत आनंद की अनुभूति कराता है। हम यहां पर कुछ महत्वपूर्ण घाटों के बारे में आपको बता रहे हैं। जहां आप बनारस घूमने के दौरान वहां पर आसानी से जा सकते हैं। और घाट का आनंद उठा सकते हैं।

वाराणसी में स्थित प्रसिद्ध घाट?

अस्सी घाट

अस्सी घाट गंगा नदी के दक्षिण क्षेत्र में स्थित पहला घाट है। जहां से गंगा बनारस में प्रवेश करती है। अस्सी घाट शहर के रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस घाट के किनारे कई मंदिर स्थित है।

इस घाट पर एक विशाल पीपल के पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थित है। जहां तीर्थ यात्री गंगा नदी में पवित्र स्नान करने के बाद पूजा अर्चना करते हैं। यह घाट सांस्कृतिक एवं धार्मिक तथा घूमने के लिए वाराणसी का केंद्र है।

इस घाट पर भीड़ सबसे ज्यादा होती है। यहां सुबह 4:00 बजे से इस घाट पर आना जाना लगा रहता है। क्योंकि सभी मांगलिक कार्य इसी घाट पर किए जाते हैं। अगर आप बनारस आए हैं। तो शाम को अस्सी घाट की गंगा आरती को देखने जरूर जाए।

मणिकर्णिका घाट

वाराणसी में स्थित मणिकर्णिका घाट को अंतिम संस्कार के लिए शुभ स्थान माना जाता है। यहां पर्यटकों को हिंदू धर्म के दास संस्कार देखने और यहां के रीति रिवाज जानने का भी मौका मिलता है।

दशाश्वमेध घाट

दशाश्वमेध घाट गंगा नदी के तट पर स्थित मुख्य घाट है। जो अपनी आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है। यह एक बहुत ही आकर्षक धार्मिक स्थल है। जहां पर कई तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं। हर दिन शाम को इस घाट पर आयोजित गंगा आरती सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। जिसमें प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं।

हरिशचंद्र घाट

वाराणसी में मृतकों के दास संस्कार के लिए 2 घाट बहुत ही प्रसिद्ध है। पहला मणिकर्णिका घाट और दूसरा राजा हरिश्चंद्र घाट।

वाराणसी में स्थित प्रसिद्ध मंदिर?

दोस्तों वाराणसी में बहुत सारे मंदिर है। आपको हर एक सड़क और गली में एक मंदिर जरूर मिल जाएगा। और यहां पर कुछ ऐसे मंदिर हैं जिनका ऐतिहासिक और बनावट के लिहाज से खास महत्व है।

काशी विश्वनाथ मंदिर | kashi vishwanath temple

अगर आप वाराणसी की यात्रा करने जा रहे हैं तो काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करें बिना आपकी यात्रा अधूरी रह जाएगी। यह मंदिर हिंदू के लिए सबसे पवित्र दर्शनीय स्थलों में से एक है। जो भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में मौजूद शिव के ज्योतिर्लिंग को देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है।

तुलसी मानस मंदिर

तुलसी मानस मंदिर वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर दुर्गा मंदिर के नजदीक में स्थित सफेद संगमरमर से बना हुआ एक भव्य मंदिर है। ऐसा कहा जाता है कि इसी स्थान पर संत तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना की थी। इसलिए इसे तुलसी मानस मंदिर कहा जाता है।

दुर्गा मंदिर

दुर्गा मंदिर वाराणसी शहर के रामनगर में स्थित मां दुर्गा को समर्पित प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। लाल पत्थर से बने इस भव्य मंदिर में मां दुर्गा के अलावा बाबा भैरवनाथ, मां काली, मां लक्ष्मी, एवं मां सरस्वती की प्रतिमा है। यह मांगलिक कार्य, मुंडन इत्यादि में मां के दर्शन के लिए आते हैं।

संकट मोचन हनुमान मंदिर

संकट मोचन हनुमान मंदिर अस्सी नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर भगवान राम और हनुमान को समर्पित है। यहां हनुमान जयंती बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है। और इस दौरान एक शोभायात्रा भी निकाली जाती है। वाराणसी में मंदिरों के अलावा भी बहुत सी घूमने लायक जगह हैं। जैसे सारनाथ।

सारनाथ

अगर आप भीड़भाड़ से दूर जाना चाहते हैं और सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं तो आप वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सारनाथ जा सकते हैं। सारनाथ बोधों का यक तीर्थ स्थल है। यही पर भगवान बुध ने अपना ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। इसके आसपास कई खूबसूरत जगह ओर मंदिर है।

वाराणसी के प्रसिद्ध भोजन है?

दोस्तों बनारस अपनी सांस्कृतिक विरासत और फेमस तीर्थ स्थल होने के साथ-साथ फेमस फूड आइटम के लिए भी प्रसिद्ध है।तो बनारस की यात्रा पर आप यहां के फूड आइटम्स जैसे पूरी-सब्जी और जलेबी, कचोरी, बनारसी पान, ठंडाई, लस्सी, या बनारस के डिश लवंगलता, दम आलू ओस की बूंद से बनी बनारसी मलाइयों और कुल्हड़ वाली चाय। इन सभी खाने पीने की चीजों का आनंद लेना बिल्कुल ना भूलें।

वाराणसी मे कितने घाट है?

वाराणसी में 84 घाट है।

मुगलसराय रेलवे स्टेसन का दूसरा नाम क्या है?

मुगलसराय रेलवे स्टेसन का दूसरा नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन है।